Friday, June 4, 2021

कुछ यूँ ही

 दर्द को बयां करने का वक़्त ना आए,

मेरे खुदा मेरा संयम यूँ ही बनाए रखना ।

वो मुझे रात -भर इधर-उधर की बातों में उलझाए रहे,

मुद्दे की बात तो अहले सुबह की है ।

वो जो कहना चाहते थे, कहने की न उन्होंने हिम्मत की, 

हम उनकी बातों में उलझे रहे, समझने की न हमने नाटक की ।

मन को न उदास होने दो 

जग की कड़ियों को टूट जाने दो 

बहता हो नीर तो बह जाने दो 

बाँध के रखने की ख़्वाहिश जाने दो 

चलता है सब कुछ चल जाने दो 

जीवन को रागिनी बनाने दो 

हिलता है विश्वास हिल जाने दो 

वक़्त की धार में बह जाने दो 

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